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Sunday, 15 May 2016

लोकोदय—एक समानांतर हस्तक्षेप


१- हमारा आन्दोलन

लोकविमर्श जनपक्षधर लेखकों / कवियों का सामूहिक आन्दोलन है। इस आन्दोलन का आरम्भ 2014 जनवरी से हुआ। इस आन्दोलन का पहला बड़ा आयोजन जून 2015 पिथौरागढ़ में सम्पन्न हुआ। इस आन्दोलन का मुख्य लक्ष्य राजधानी व सत्ता केन्द्रित बुर्जुवा साहित्य के प्रतिपक्ष में हिन्दी की मूल परम्परा लोकधर्मी साहित्य तथा गाँव और नगरों में लिखे जा रहे मठों और पीठों द्वारा उपेक्षित पक्षधर लेखन को बढावा देना है। नव उदारवाद व भूंमंडलीकरण के  फलस्वरूप जिस तरह से जनवादी लेखन को हाशिए पर लाने के लिए राजधानी केन्द्रित पत्रिकाएँ व प्रकाशन पूंजीपतियों की अकूत सम्पति द्वारा पोषित पुरस्कारों के सहारे साजिशें की जा रही हैं इससे साहित्य की समझ और व्यापकता पर प्रभाव पड़ा है। अस्तु विश्वपूंजी द्वारा प्रतिरोधी साहित्य को नष्ट करने के कुत्सित प्रयासों व लेखन में गाँव की जमीनी उपेक्षाओं के खिलाफ यह आन्दोलन दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ता जा रहा है। आज इस आन्दोलन में लगभग 100 साहित्यकार जुड चुके हैं। हम मठों, पीठों, पूँजीवादी फासीवादी साम्प्रदायिक ताकतों के किसी भी पुरस्कार, लालच, साजिश का विरोध करते हैं। हम साहित्य में उत्तर आधुनिकता के रूपवादी आक्रमण के खिलाफ 'लोकभाषा' व लोकचेतना  की नव्यमार्क्सवादी अवधारणा पर जोर देते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि आवारा पूँजी के इस साहित्यिक संस्करण का माकूल जवाब लोक भाषा और लोक चेतना से ही दिया जा सकता है। लोकविमर्श कोई संगठन नहीं है। यह आन्दोलन वाम संगठनों को मजबूत करने के लिए है। हम छद्मवामपंथियों के खिलाफ हैं जो पद और पुरस्कार पाने के लिए अपनी ताकत व पैसा के प्रयोग करते हुए वैचारिकता को भी नीलाम कर देते हैं क्योंकि हमारा अभिमत है कि ऐसे लोगों द्वारा आम जनता में वाम के प्रति गलत छवि निर्मित होती है। लोकविमर्श आन्दोलन में सम्मिलित होने की केवल एक ही अर्हता है कि व्यक्ति लेखक हो और पक्षधर हो; मठों और पीठों, छद्म लेखकों से दूर आम जन के लिए लिखता हो व जमीन में रहने, खाने, सोने व लड़ने की आदत भी हो। हमारे आयोजन गाँव व छोटी जगहों पर होते हैं। हम होटल व बड़े भवनों का प्रयोग नहीं कर सकते हैं। जो भी सुविधा स्थानीय कमेटी देती है उसी का प्रयोग करना अनिवार्य होता है तथा न कोई मुख्य अतिथि होता है न कोई नेता या महान व्यक्तित्व होता है, सब आपस में कामरेड होते हैं और आपसी चन्दे से हर आयोजन होते हैं। जो भी साथी इस आन्दोलन में भागीदारी करना चाहें उपरोक्त शर्तों के साथ उनका स्वागत है, अभिनन्दन है।

२- लोकोदय

लोकोदय प्रकाशन लोकविमर्श आन्दोलन का अनुषांगिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान है। लोकोदय प्रकाशन की स्थापना साहित्य में प्रभावी बाजारवाद के खिलाफ पाठकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर की गयी है। हम पूँजीवादी बाजारीकरण के विरुद्ध जनपक्षधर लोकधर्मी साहित्य के प्रकाशन, प्रचार व प्रसार के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह जनपक्षधर लेखकों व कवियों का सामूहिक आन्दोलन है। हम आम प्रकाशनों के बरक्स कम कीमत पर श्रेष्ठ साहित्य आम जनता को उपलब्ध कराएँगे। प्रकाशन के विभिन्न राज्यों में पुस्तक बिक्रय केन्द्र हैं तथा अन्य जनधर्मी प्रकाशनों के साथ मिलकर देश भर में पठन-पाठन का वातावरण सृजित करने के लिए पुस्तक मेला आदि का आयोजन कराया जाएगा। हमारे प्रकाशन की पुस्तकें विभिन्न वेबसाईटों व ई-मार्केटिंग साईटों पर भी उपलब्ध रहेंगी।

३- लोकोदय के उद्देश्य

१- लोकोदय जनपक्षर व लोकधर्मी वाम लोकतान्त्रिक साहित्य व संस्कृति के अभिरक्षण, परिपोषण व प्रकाशन हेतु प्रतिबद्ध है।

२- लोकोदय लोकविमर्श आन्दोलन का अनुषांगिक व व्यावसायिक प्रतिष्ठान है। लोकविमर्श आन्दोलन से जुड़े लेखकों व जनवादी लेखक संघ के लेखकों का प्रकाशन हम अपने संगठन के नियमानुसार करेंगें।

३- लोकधर्मी साहित्य के प्रकाशन हेतु एक गैर व्यावसायिक सामूहिक कोष स्थापित है। जिसकी देखरेख लोकविमर्श आन्दोलन के वरिष्ठ साथियों द्वारा की जाएगी व साथियों द्वारा ही इस कोष की वृद्धि हेतु उपाय सुझाए जाएँगे। लोकोदय अपने स्तर से इस कोष की वृद्धि का हर सम्भव प्रयास करेगा।

४- लोकविमर्श आन्दोलन के अतिरिक्त अन्य लेखकों की किताबों का प्रकाशन गुणवत्ता, विचार व लोकोदय संस्था की व्यावसायिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। इसका निर्णय हमारी संपादक कमेटी व संचालन कमेटी करेगी।

५- हम पुरानी व अनुपलब्ध आऊट आफ प्रिन्ट लोकधर्मी वाम किताबों के पुनर्प्रकाशन के लिए वचनबद्ध हैं। कोष की उपलब्धता के आधार पर हम समय समय पर ऐसी पुस्तकों का प्रकाशन करते रहेगें।

६- हम सभी ऐसे लेखकों की पुस्तकों का प्रकाशन करेगें जो दूर दराज गाँव व शहरों में संघर्ष कर रहे है़, जो उपेक्षित व प्रकाशकों द्वारा शोषित हैं।

७- हम किताबों को जनता के बीच ले जाएँगे व आम पाठक से प्राप्त टिप्पणियों को 'लोकोदयब्लाग में प्रकाशित करेंगे।

८- लेखकों को रायल्टी दी जाएगी जिसका हिसाब किताब हमारी वेबसाईट पर उपलब्ध रहेगा।

९- हम विधा के रूप में किसी भी कृति के साथ भेदभाव नहीं करेंगे। हम ग़ज़ल, गीत-नवगीत, छन्द, मुक्तक, विज्ञान, इतिहास, लोकसाहित्य व कोश आदि का भी प्रकाशन करेंगे।

१०- प्रकाशन की आर्थिक स्थिति के अनुसार हम समय समय पर लोकविमर्श द्वारा विमोचन व अन्य आयोजन कराए जाएँगे।  

४- हमारे मुख्य प्रकाशन
१- प्रतिपक्ष का पक्ष आलोचना - उमाशंकर सिंह परमार
२- कोकिला शास्त्र कहानी - संदीप मील
३- वे तीसरी दुनिया के लोग - कविता - बृजेश नीरज
४- आधुनिक कविता आलोचना - अजीत प्रियदर्शी
५- यही तो चाहते हैं वे - कविता - प्रेम नंदन


संपर्क
श्रीमती नीरज सिंह
लोकोदय प्रकाशन   
६५/४४, शंकर पुरी,
छितवापुर रोड, लखनऊ- २२६००१
मोबाइल- ९६९५०२५९२३
        ९८३८८७८२७०

ई-मेल- lokodayprakashan@gmail.com

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