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Sunday, 15 May 2016

घोषणा

लोक विमर्श आंदोलन के अंग के तौर पर साथियों की आम राय से प्रकाशन की शुरुआत करने का निर्णय लिया गया था। उस निर्णय के तारतम्य में 01 जनवरी 2016 को 'लोकोदय प्रकाशन' की स्थापना कर दी गयी है। बाँदा में हुयी बैठक में प्रकाशन की कुछ रूप रेखा तय की गयी थी जो इस प्रकार है-
1- प्रकाशन का उद्देश्य कम मूल्य पर पुस्तकें उपलब्ध कराना है।
2- प्रकाशन का लक्ष्य उस आदर्श स्थिति को प्राप्त करना है जिसमें लेखक से कोई आर्थिक सहयोग न लिया जाए और उसकी पुस्तक पर उसे रॉयल्टी दी जाए।
3- लोक विमर्श आंदोलन और प्रकाशन दोनों प्रारम्भिक अवस्था में हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं इसलिए अभी फिलहाल लेखक से पुस्तक प्रकाशन का खर्च आर्थिक सहयोग के रूप में लिया जाएगा।
4- प्रारम्भिक दौर में पुस्तकें पेपर बैक में ही छपेंगी।
5- प्रत्येक लेखक को उसकी पुस्तक की 10 प्रतियाँ दी जाएँगी।
7- शेष प्रतियाँ सभी प्रचलित साधनों का प्रयोग करते हुए प्रकाशन द्वारा बिक्री की जाएँगी।
8- बिक्री से प्राप्त होने वाली आय में से लेखक को लाभांश दिया जाएगा।
9- प्रकाशन, डाक और अन्य सभी खर्चों को जोड़ते हुए पुस्तक का मूल्य निर्धारित किया जाएगा लेकिन किसी भी पुस्तक का मूल्य रु 100/- से अधिक नहीं होगा।
11- जो लेखक दस से अधिक पुस्तक लेना चाहेंगे उन्हें अतिरिक्त प्रतियों का मूल्य देना होगा अथवा उसके बराबर धनराशि उनके लाभांश में से काटी जाएगी।


लोक विमर्श आन्दोलन हेतु एक कोश स्थापित किया जाना बेहद जरूरी है। हम अपने साथियों की पुस्तकें तभी नि:शुल्क या बगैर कर्ज के छाप सकेगें जब एक कोश स्थापित होगा। अभी आगे हमें सप्तक व साहित्य के इतिहास पर काम करना है। साथ ही पुराने लेखकों की आउट ऑफ़ प्रिंट हो चुकी किताबों को भी छापना है। अस्तु आप सभी मित्र कोश निर्माण हेतु सुझाव दें तो अच्छा रहे। आन्दोलन आगे बढ़ता रहे।
आशा है सभी साथी इस योजना में साथ देंगे। इस योजना को बेहतर बनाने में आप सभी का सहयोग और सुझाव आमंत्रित हैं।

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